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Khwahishon Ka Safar (ख्वाहिशों का सफ़र) – Dewashish Upadhyay

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ख्वाहिशों का सफ़र (IIT से IAS तक)

अंकुर ठाकुर बिहार के आरा जिले का एक मेधावी छात्र था, परंतु उसकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में जिले में टॉप करने के बाद उसके पिताजी आईआईटी की तैयारी करवाना चाहते थे लेकिन उनके पास फीस भरने को पैसा नहीं था। बावजूद इसके अंकुर अपनी काबिलियत के दम पर फ्री सीट पर कोटा की एक प्रतिष्ठित कोचिंग में एडमिशन प्राप्त करता है। पहले प्रयास में आईआईटी मेंस में अच्छे नंबर आने के बावजूद एडवांस एग्जाम से 15 दिन पहले उसे डेंगू हो जाता है, जिसके कारण उसका IIT में फाइनल सलेक्शन नहीं हो पाता है। दूसरे अटेम्प्ट में मेंस से 3 दिन पहले उसके पिताजी का देहांत हो जाता है, उसके पास इतना भी पैसा नहीं होता है कि वह टिकट लेकर अपने गांव आरा जा सके। वह बिना टिकट यात्रा करता है लेकिन विदाउट टिकट पकड़ लिया जाता है। जिसके कारण वह गांव की बजाय जेल पहुंच जाता है
….. दम तोड़ती ख्वाहिशों से, संघर्ष की ऐसी दास्तां जो आपके रोंगटे खड़े कर देगी। जिसमें जेल की दुनिया के अनुभव, प्राइवेट नौकरी की दुश्वारियों का विवरण, प्लेटफॉर्म की दुनिया से रूबरू, होने के साथ ही कंपटीशन की अनिश्चितता और असफलता के दौर में हौसले को बनाए रखने का सजीव चित्रण किया गया है।
किसी भी कंपटीशन में संघर्ष, आपका स्वयं से होता है। न कि दुनिया और प्रतियोगियों की भीड़ से!
सफलता हासिल करने की खातिर, आपको स्वयं की भावनाओं पर नियंत्रण स्थापित कर, आंतरिक रूप से स्वयं के आत्म बल को इतना मजबूत करना होगा कि असफलता आपके हौसले के आगे घुटने टेक दे।

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Description

ख्वाहिशों का सफ़र (IIT से IAS तक)

असफलताओं से संघर्ष की अनकही दास्तां !

(Motivational Story)

लेखक – देवाशीष उपाध्याय

पृष्ठ – 208

यदि आप अंदर से टूट चुके हो, तो फिर दुनिया का कोई भी मोटीवेटर आपको मोटिवेट नहीं कर सकता। मोटिवेशन अंदर से जागृत होने वाली इच्छा शक्ति है। दुर्भाग्य से मेरे अंदर वह आग ठंडी पड़ चुकी थी। उसे जगाने के लिए मैं बहुत कोशिश कर रहा था लेकिन फ्रस्ट्रेशन और डिप्रेशन की चरम अवस्था में पहुँच जाने के कारण हालात में कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। मूड सुधारने के लिए मैं कई जगह घूमने भी गया लेकिन दिमाग में घूम-फिरकर पुरानी यादें ताजा हो जाती थी। ऐसा लगता जैसे, जिंदगी थम सी गई है। पूरा ब्रह्मांड और प्रकृति मेरे प्रतिकूल कार्य कर रहे हो। मेरी नजरों के सामने कभी माँ-बापू का चेहरा, कभी आईआईटी के सपने, कभी स्वाति का फरेबी चेहरा, कभी दलवीर का खूखांर चेहरा तो कभी आईएएस का पेपर घूम रहे थे। पुरानी घटनायें मेरी आत्मा को बुरी तरह से झंकझोर रही थी। मेरे अंदर की इच्छा, महत्वाकांक्षा, संवेदना और संज्ञानात्मक क्षमता पूरी तरह से क्षीण हो चुकी थी। जिसके कारण पूरा शरीर शिथिल पड़ गया था। मैं स्थितियों पर नियंत्रण करने की नाकाम कोशिश कर रहा था। अचानक मुझे माँ की कविता याद आयी…

क्यों मढ़ता है दोष दूसरों पर,

तेरी मंजिल तो तेरे सोच पे निर्भर है।

सिर्फ चाहत से कुछ नहीं मिलता,

तेरी उड़ान की ऊॅंचाई तो तेरे जुनून पे निर्भर है।

मुमकिन है हर सपना तेरा,

तेरा इकबाल तो तेरी कोशिश पे निर्भर है।

क्यों होता है निराश असफलताओं से,

तेरा मुकाम तो तेरे हौसलों पे निर्भर है।

मिलेगीं जहान की हर आरजू तुझे,

तेरी हदें तो तेरे ख्वाहिशों पे निर्भर है।

अंकुर ठाकुर बिहार के आरा जिले का एक मेधावी छात्र था, परंतु उसकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी। हाईस्कूल की बोर्ड परीक्षा में जिले में टॉप करने के बाद उसके पिताजी आईआईटी की तैयारी करवाना चाहते थे लेकिन उनके पास फीस भरने को पैसा नहीं था। बावजूद इसके अंकुर अपनी काबिलियत के दम पर फ्री सीट पर कोटा की एक प्रतिष्ठित कोचिंग में एडमिशन प्राप्त करता है। पहले प्रयास में आईआईटी मेंस में अच्छे नंबर आने के बावजूद एडवांस एग्जाम से 15 दिन पहले उसे डेंगू हो जाता है, जिसके कारण उसका IIT में फाइनल सलेक्शन नहीं हो पाता है। दूसरे अटेम्प्ट में मेंस से 3 दिन पहले उसके पिताजी का देहांत हो जाता है, उसके पास इतना भी पैसा नहीं होता है कि वह टिकट लेकर अपने गांव आरा जा सके। वह बिना टिकट यात्रा करता है लेकिन विदाउट टिकट पकड़ लिया जाता है। जिसके कारण वह गांव की बजाय जेल पहुंच जाता है…

दम तोड़ती ख्वाहिशों से, संघर्ष की ऐसी दास्तां जो आपके रोंगटे खड़े कर देगी। जिसमें जेल की दुनिया के अनुभव, प्राइवेट नौकरी की दुश्वारियों का विवरण, प्लेटफॉर्म की दुनिया से रूबरू, होने के साथ ही कंपटीशन की अनिश्चितता और असफलता के दौर में हौसले को बनाए रखने का सजीव चित्रण किया गया है।
किसी भी कंपटीशन में संघर्ष, आपका स्वयं से होता है न कि दुनिया और प्रतियोगियों की भीड़ से!
सफलता हासिल करने की खातिर, आपको स्वयं की भावनाओं पर नियंत्रण स्थापित कर, आंतरिक रूप से स्वयं के आत्मबल को इतना मजबूत करना होगा कि असफलता आपके हौसले के आगे घुटने टेक दे।

Additional information

Weight 0.2 kg
Dimensions 23 × 13 × 0.8 cm

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