Description
लद्दाख मर्डर्स
लेखक – नील कृष्ण
पृष्ठ : 304
हत्यारा कत्ल पर कत्ल कर रहा था। लद्दाख की ठंडी वादियों में लाशें गिर रही थीं और पुलिस महकमा खुद को बेबस महसूस कर रहा था। हर कत्ल से पहले वक़्त, जगह और शिकार का नाम बता कर भी कातिल कामयाब होकर भाग निकलता था। आख़िरकार आला कमान को मजबूरन दिल्ली से विकास गुप्ता को बुलाना पड़ा। वह जासूस जिसने असंभव माने जाने वाले मामलों को सुलझाकर नाम बना लिया था। विकास अपने साथी जगमोहन के साथ लद्दाख पहुँचता है, लेकिन उसके आने से खेल रुका नहीं। पुलिस थाने के भीतर मारा गया हवलदार, हाई-प्रोफाइल लोगों से जुड़ी रहस्यमयी मौतें, और एक साध्वी जिसकी भविष्यवाणियाँ सच होती जा रही थीं। हर सुराग विकास को और गहरे जाल में खींचता चला जाता है।
फिर आता है खुला चैलेंज। कातिल ऐलान करता है कि अगर विकास उसकी भनक भी पा ले, तो वह सरेंडर कर देगा। और अगर नाकाम रहा… तो विकास को यह केस छोड़कर लौटना होगा।
क्या कातिल वाकई विकास के सामने है… या ये कोई बड़ा मायाजाल है? एक ज़रा-सी चूक। एक आख़िरी दांव। और एक ऐसा खुलासा, जो पूरे केस को पलट देता है।
रहस्य के सागर में गोते लगाने के लिए पढ़िए —लद्दाख मर्डर्स






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