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999 Thaangi | Sabuj Halder || 999 थाँगी | सबुज हालदार

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999 – नरक में आपका स्वागत है :

जब मनुष्य जीवन से हार मान ले, और मृत्यु को ही मुक्ति समझ बैठे—तब क्या आत्मा सचमुच मुक्त हो जाती है? 999 एक ऐसे युवक की कथा है जो अपने ही कर्मों के अंधकार में प्रवेश करता है, जहाँ हर प्रश्न का उत्तर दंड बन जाता है और हर सत्य भय का रूप धारण कर लेता है। एक रहस्यमय लोक, एक दैवी उपस्थिति, और आत्म-साक्षात्कार की अग्नि-परीक्षाएँ—जहाँ मनुष्य को अपने ही पापों, इच्छाओं और अधूरे कर्तव्यों का सामना करना पड़ता है। भगवद् गीता से प्रेरित यह आध्यात्मिक हॉरर थ्रिलर, कर्म, भक्ति और मृत्यु के पार स्थित सत्य को एक भयावह, दार्शनिक यात्रा के रूप में प्रस्तुत करता है। 999 केवल एक कहानी नहीं—यह आत्मा का न्यायालय है, जहाँ कोई भी निर्दोष नहीं।

थाँगी:

हर प्राचीन स्थान पवित्र नहीं होते और कुछ प्राचीन चीज़ें वर्तमान काल में भी सक्रिय हैं। भारत-चीन सीमा के साये में बना एक आर्मी अस्पताल जहाँ दीवारें रहस्य फुसफुसाती हैं और अँधेरा साँस लेता है। दिल्ली से आयी नर्स सुनयना एक ऐसे अभिशप्त सत्य के निकट पहुँचती है जिसे जानना मना है। चौदहवीं अमावस्या की रात, एक बुझता हुआ दीपक, और एक नाम— थाँगी। जैसे ही अंतिम रोशनी बुझती है, कुछ जाग उठता है… और फिर कोई सुरक्षित नहीं रहता। थाँगी डर, विश्वासघात और काले जादू से रची एक दार्शनिक हॉरर कथा है, जहाँ देवता भी रक्षक नहीं, बल्कि सज़ा देने वाले बन जाते हैं। सावधान: इसे पढ़ते समय अँधेरे में मत बैठिए—क्योंकि कोई फुसफुसा सकता है… “बोलो… बोलो… थाँगी …”

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Description

999 थाँगी

लेखक – सबुज हालदार

पृष्ठ – 220

इस पुस्तक में संकलित हैं दो ऐसे हॉरर लघु उपन्यास, जो हमारे मन में केवल भय नहीं पैदा करते बल्कि आत्मा को झकझोर देते हैं:

999 – नरक में आपका स्वागत है :

जब मनुष्य जीवन से हार मान ले, और मृत्यु को ही मुक्ति समझ बैठे—तब क्या आत्मा सचमुच मुक्त हो जाती है? 999 एक ऐसे युवक की कथा है जो अपने ही कर्मों के अंधकार में प्रवेश करता है, जहाँ हर प्रश्न का उत्तर दंड बन जाता है और हर सत्य भय का रूप धारण कर लेता है। एक रहस्यमय लोक, एक दैवी उपस्थिति, और आत्म-साक्षात्कार की अग्नि-परीक्षाएँ—जहाँ मनुष्य को अपने ही पापों, इच्छाओं और अधूरे कर्तव्यों का सामना करना पड़ता है। भगवद् गीता से प्रेरित यह आध्यात्मिक हॉरर थ्रिलर, कर्म, भक्ति और मृत्यु के पार स्थित सत्य को एक भयावह, दार्शनिक यात्रा के रूप में प्रस्तुत करता है। 999 केवल एक कहानी नहीं—यह आत्मा का न्यायालय है, जहाँ कोई भी निर्दोष नहीं।

थाँगी:

हर प्राचीन स्थान पवित्र नहीं होते और कुछ प्राचीन चीज़ें वर्तमान काल में भी सक्रिय हैं। भारत-चीन सीमा के साये में बना एक आर्मी अस्पताल जहाँ दीवारें रहस्य फुसफुसाती हैं और अँधेरा साँस लेता है। दिल्ली से आयी नर्स सुनयना एक ऐसे अभिशप्त सत्य के निकट पहुँचती है जिसे जानना मना है। चौदहवीं अमावस्या की रात, एक बुझता हुआ दीपक, और एक नाम— थाँगी। जैसे ही अंतिम रोशनी बुझती है, कुछ जाग उठता है… और फिर कोई सुरक्षित नहीं रहता। थाँगी डर, विश्वासघात और काले जादू से रची एक दार्शनिक हॉरर कथा है, जहाँ देवता भी रक्षक नहीं, बल्कि सज़ा देने वाले बन जाते हैं। सावधान: इसे पढ़ते समय अँधेरे में मत बैठिए—क्योंकि कोई फुसफुसा सकता है… “बोलो… बोलो… थाँगी …”

‘सूरज पॉकेट बुक्स’ से प्रकाशित हॉरर कथा-संग्रह ‘मुरांग-नरक का शैतान’ के लेखक सबुज हालदार की नई किताब ‘999’ आपको भय, रहस्य और आध्यात्मिकता की एक अलग दुनिया में ले जाएगी।

Additional information

Weight 0.2 kg
Dimensions 22 × 13 × 2 cm

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