Description
जोकर करे न चाकरी
लेखक – शुभानन्द
पृष्ठ – 266
“जोकर करे न चाकरी, पंछी करे न काम।
सामने हैं हम खड़े, पूछो हमारा नाम।”
ये लफ़्ज़ यूरोप के पूर्व जासूस और अंतरराष्ट्रीय अपराधी जोकर जॉर्ज ग्रूबर ने भारतीय सीक्रेट सर्विस के एजेंट अमर वर्मा से, सीधे हेडक्वार्टर के अंदर खड़े होकर कहे थे।
अमर के लिए जोकर की वहाँ मौजूदगी ही सबसे बड़ी परेशानी नहीं थी। उसे असल झटका तब लगा जब चीफ़ अभय कुमार ने आदेश दिया कि एक वर्तमान मिशन में जोकर को भी शामिल किया जाएगा।
न चाहते हुए भी अमर को जोकर के साथ काम करना पड़ता है। मिशन था—डार्कवेब और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए काम करने वाले एक रहस्यमयी शख्स रघुवीर कुमार उर्फ वज़ीर तक अपनी पहुँच बनाना।
लेकिन यह सिर्फ एक स्टिंग ऑपरेशन नहीं था। जाँच के दौरान उन्हें एक ऐसी डील का पता चलता है, जो इस मिशन का स्तर पूरी तरह बदल देती है।
एक घातक एआई सिस्टम, ‘वोल्चोक’, जिसका सौदा रूसी टेक एक्सपर्ट ज्यादा से ज्यादा कीमत पर करना चाहते हैं और जिसकी तलाश में अमेरिका और चीन के दावेदार भी भारत की ज़मीन पर उतर चुके हैं।
इस एआई को पाने की होड़ में यह खेल हर कदम पर और खतरनाक होता जाता है।
और सवाल सिर्फ इतना रह जाता है कि क्या अमर और जोकर इस जाल को समय रहते समझ पाएंगे
या यह टेक्नो वॉर भारत की अर्थव्यवस्था को निगल जाएगी?
जावेद अमर जॉन (JAJ) यूनिवर्स से निकला एक धमाकेदार उपन्यास






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